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Showing posts from April, 2022

हिंदी story पार्ट -2

 ईश्वर से धोखा  एक बार एक चालाक आदमी भूख से बेहाल इधर-उधर भोजन की तलाश में घूम रहा था। अंत में जब उसे भोजन प्राप्त नहीं हुआ तो निराश होकर ईश्वर के सामने घुटने टेक दिए- ”हे ईश्वर, मुझ पर दया करो। अगर तुम मुझे एक सौ खजूर दोग तो मैं आधे तुम्हारी सेवा में अर्पित कर दूंगा।“ जब उसने नेत्र खोले तो सचमुच उसके आगे खजूरों का ढेर लगा हुआ था। वह आदमी बहुत प्रसन्न हुआ और खजूरों की गिनती करने लगा। पूरे पचास थे। उसने सभी खजूर पेट भर खा लिए और बोला- ”हे ईश्वर! मुझे नहीं मालूम था कि तुमने अपने हिस्से के खजूर पहले ही रख लिए हैं। तुम तो हिसाब-किताब में बड़े पक्के हो।“ इतना कहकर वह चालाक आदमी वहां से चलता बना। निष्कर्ष- चालाक व्यक्ति अपने तर्क से ईश्वर को भी धोखा दे देता है। 2.नीला सियार  एक जंगल में एक बहुत ही दुष्ट सियार रहता था. जंगल के सभी जानवर उससे बेहद परेशान थे. यहां तक कि बाकी के सियार भी उससे तंग आ चुके थे, क्योंकि वो ख़ुद को सबसे श्रेष्ठ समझता था और यहां कि बात वहां लगाकर सब में फूट डालता था. एक दिन दुष्ट सियार शिकार की तलाश में जंगल से काफ़ी दूर निकल आया और एक बस्ती में जा पहुंचा. ...

हिंदी story पार्ट -27

 1.नीला सियार  एक जंगल में एक बहुत ही दुष्ट सियार रहता था. जंगल के सभी जानवर उससे बेहद परेशान थे. यहां तक कि बाकी के सियार भी उससे तंग आ चुके थे, क्योंकि वो ख़ुद को सबसे श्रेष्ठ समझता था और यहां कि बात वहां लगाकर सब में फूट डालता था. एक दिन दुष्ट सियार शिकार की तलाश में जंगल से काफ़ी दूर निकल आया और एक बस्ती में जा पहुंचा. वहां कुत्तों की टोली सियार के पीछे पड़ गई. दुष्ट सियार जान बचाने के लिए भागा और भागते-भागते वो एक रंग से भरे ड्रम में जा गिरा. वो चुपचाप उस ड्रम में ही पड़ा रहा. जब उसे लगा कि ख़तरा टल गया, तो वो ड्रम से बाहर आया, लेकिन तब तक उसका पूरा शरीर ड्रम में भरे नीले रंग से रंग चुका था. वो जंगल में आया, तो उसने देखा कि उसके नीले रंग को देखकर सभी जानवर उससे डरकर भाग रहे हैं. सबको ख़ुद से यूं डरता देख दुष्ट सियार के मन में एक योजना आई. डरकर भागते जानवरों को रंगे सियार ने आवाज़ दी, “भागो मत, मेरी बात सुनो. मेरी तरफ़ देखो. मेरा रंग कितना अलग है. ऐसा रंग किसी जानवर का नहीं है? दरअसल, भगवान ने मुझे यह ख़ास रंग तुम्हारे पास भेजा है. मैं तुम सबको भगवान का संदेश सुनाऊंगा. ब्रह्माजी ने...

हिंदी story पार्ट -26

  सिंहासन बत्तीसी सिंघासन बत्तीसी (संस्कृत:सिंहासन द्वात्रिंशिका, विक्रमचरित) एक लोककथा संग्रह है। प्रजा से प्रेम करने वाले,न्याय प्रिय, जननायक, प्रयोगवादी एवं दूरदर्शी महाराजा विक्रमादित्य भारतीय लोककथाओं के एक बहुत ही चर्चित पात्र रहे हैं। उनके इन अद्भुत गुणों का बखान करती अनेक कथाएं हम बचपन से ही पढ़ते आए हैं। सिंहासन बत्तीसी भी ऐसी ही ३२ कथाओं का संग्रह है जिसमें ३२ पुतलियाँ विक्रमादित्य के विभिन्न गुणों का कहानी के रूप में वर्णन करती हैं। सिंघासन बत्तीसी भी संस्कृत की रचना है जो उत्तरी संस्करण में सिंहासनद्वात्रिंशति तथा "विक्रमचरित" के नाम से दक्षिणी संस्करण में उपलब्ध है। पहले के संस्कर्ता एक मुनि कहे जाते हैं जिनका नाम क्षेभेन्द्र था। बंगाल में वररुचि के द्वारा प्रस्तुत संस्करण भी इसी के समरुप माना जाता है। इसका दक्षिणी रुप ज्यादा लोकप्रिय हुआ और स्थानीय भाषाओं में इसके अनुवाद होते रहे और पौराणिक कथाओं की तरह भारतीय समाज में मौखिक परम्परा के रुप में रच-बस गए। इन कथाओं की रचना "वेतालपञ्चविंशति" या "बेताल पच्चीसी" के बाद हुई पर निश्चित रुप से इनके रचन...

हिंदी story पार्ट -25

 बीरबल की तीरंदाजी  एक बार अकबर का दरबार सजा हुआ था | अकबर बीरबल की तारीफ कर रहे थे | बीरबल की तारीफ़ सुनकर सारे दरबारी उनसे ईर्ष्या करते थे | एक दरबारी ने बीरबल पर हस्ते हुए कहा -“बीरबल, तुम सिर्फ बातो के तीरंदाज हो, अगर तीर कमान पकड़ कर तीरंदाज करने पड़े तो हाथ पाँव फूल जायेंगे |  यह बात सुनकर अकबर ने बीरबल से कहा – ‘बीरबल तुम दरबारीयो को अपने अचूक तीरंदाजी का कमाल दिखाओ |’ सबने सोचा – आज तो बीरबल फस गया है | पर बीरबल कहाँ हार मानने वाला था | बीरबल ने कहा – ‘हुजूर, मै साबित कर दूंगा मै बातो की साथ साथ अच्छा तीरंदाज भी हूँ | सभी दरबारी, अकबर एवं बीरबल मैदान मे जा पहुंचे | बीरबल के हाथो मे तीर कमान दिया गया और दूरी पर एक लक्ष्य रखकर निशाना साधने को कहा गया |  बीरबल ने पहला तीर चलाया तो निशाना चूक गया| वह तुरंत बोला – ‘यह थी बादशाह के सालेजी की तीरंदाजी|’ बीरबल का दूसरा तीर भी चूक गया | इस पर बीरबल बोला -‘यह है राजा टोडरमल की तीरंदाजी |’ सयोंग से तीसरा तीर सीधा निशाने पर लगा |  बीरबल गर्व से बोला – ‘और इसे कहते है बीरबल की तीरंदाजी |’ अकबर खिलखिलाकर हंस पड़े | वे समझ...

हिंदी story पार्ट -24

 तीन सवाल  एक बार सभी दरबारी, बीरबल एवं राजा अकबर दरबार मे बैठे थे | सभी लोग दरबार के अलग अलग पदो एवं मंत्री पदो के बारे मे विचार विमर्श कर रहे थे | उनमें से एक मंत्री, जो महामंत्री का पद पाना चाहता था। उसने मन ही मन एक योजना बनाई। उसे मालूम था कि बीरबल उससे ज्यादा बुद्धिमान था, लेकिन फिर भी वह मुख्य सलाहकार का पद पाना चाहता था।  एक दिन दरबार में अकबर ने बीरबल की बहुत तारीफ की। यह सब सुनकर उस मंत्री को बहुत गुस्सा आया। उसने महाराज से कहा कि यदि बीरबल मेरे तीन सवालों का उत्तर सही-सही दे देता है तो मैं उसकी बुद्धिमता को स्वीकार कर लूंगा। यदि नहीं तो इससे यह सिद्ध होता है कि वह आपका चापलूस है। अकबर को मालूम था कि बीरबल उसके सवालों का जवाब जरूर दे देगा इसलिए उन्होंने उस मंत्री की बात मान ली। उस मंत्री के तीन सवाल थे – 1. आकाश में कितने तारे हैं? 2. धरती का केन्द्र कहां है? 3. सारे संसार में कितने स्त्री और कितने पुरूष हैं? अकबर ने बीरबल पर भरोसा जताते हुए। उसे इन सवालों के जवाब देने के लिए कहा और साथ ही यह शर्त रखी कि यदि वह इनका उत्तर नहीं जानता है तो मुख्य सलाहकार का पद छोड़...

हिंदी story पार्ट -23

 बीरबल ने पहचानी अजनबी की मातृभाषा  एक बार एक अजनबी व्यक्ति बादशाह अकबर के दरबार में आया और बादशाह के सम्मान में झुककर उसने कहा, ”जहांपनाह! मैं बहुत सारी भाषाओं में बात कर लेता हूं। मैं आपकी बहुत अच्छी सेवा कर सकता हूं, यदि आप मुझे अपने दरबार में मंत्रियों में शामिल कर लें।“ बदशाह ने उस व्यक्ति की परीक्षा लेने का निश्चय किया। उसने अपने मंत्रियों को उस आदमी से विभिन्न भाषाओं में बात करने को कहा। अकबर के दरबार में अलग-अलग राज्यों के लोग रहते थे। हर किसी ने उससे अलग-अलग भाषा में बात की। प्रत्येक मंत्री जो आगे आकर उससे अपनी भाषा में बात करता, वह व्यक्ति उसी भाषा में उत्तर देता था। सारे दरबारी उस व्यक्ति की भाषा कौशल की तारीफ करने लगे। अकबर उससे बहुत प्रभावित हुआ। उसने उसे अपना मंत्री बनने की पेशकश की। किन्तु व्यक्ति ने कहा, ”मेरे मालिक! मैंने आज कई भाषाओं में बात की। क्या आपके दरबार में कोई है, जो मेरी मातृभाषा बता सके।“ कई मंत्रियों ने उसकी मातृभाषा बताने की कोशिश की, परंतु असफल रहे। वह व्यक्ति मंत्रियों पर हंसने लगा। उसने कहा, ”मैंने यहां के बारे में सुना है कि इस राज्य में बुद्...

हिंदी story पार्ट -22

 कंजूस व्यापारी और गरीब चित्रकार  अकबर के राज्य में हरिनाथ नाम का एक व्यक्ति रहता था। हरिनाथ एक प्रतिभाशाली चित्रकार था। वह चित्र बनाकर अपना जीवन व्यतीत करता था। क्योंकि वह चित्रकारी में बहुत अच्छा था, इसलिए वह पूरे राज्य में प्रसिद्ध था। दूर दराज के क्षेत्रों के अमीर लोग उससे अपना चित्र बनाने का आग्रह करते थे। हरिनाथ एक चित्र बनाने में बहुत समय लगाता था, क्योंकि वह पहले उसकी पूरी जानकारी इकट्ठी करता था इसी कारण उसके चित्र जीवित प्रतीत होते थे। परंतु वह बहुत पैसे नहीं कमा पाता था और कमाया हुआ अधिकतर धन चित्र बनाने के लिए कच्चे माल की खरीद में खर्च हो जाता था। एक दिन एक अमीर व्यापारी ने हरिनाथ को एक चित्र बनाने के लिए आमंत्रित किया। हरिनाथ इस उम्मीद से व्यापारी के घर गया कि यह उसे उसके काम के अच्छे पैसे दे देगा। वह कुछ दिनों के लिए वहां रूका और उसने व्यापारी को अपनी चित्रकारी से संतुष्ट करने के लिए कड़ी मेहनत की। किन्तु व्यापारी एक कंजूस व्यक्ति था। जब कुछ दिनों की कड़ी मेहनत के बाद चित्र पूरा हो गया, तब हरिनाथ उसे व्यापारी के पास ले गया। कंजूस व्यापारी ने मन में सोचा, ”यह चित्...

हिंदी story पार्ट -21

 सड़क के मोड़  एक बार फारस के राजा ने अकबर को एक अजीब सा पत्र भेजा। इस पत्र में उसने अकबर से पूछा, ”बताइये आपके राज्य में हर सड़क में कितने मोड़ हैं?“ अकबर इस सवाल से हैरान हो गया। उसका राज्य बड़े राज्यों में से एक था। अपने दरबार के मंत्रियों को भेजकर सड़क के मोड़ों की गिनती करवाना संभव नहीं था। फिर भी सम्राट ने अपने प्रधानमंत्री टोडरमल को बुलाया और यह काम पूरा करने को कहा। टोडरमल ने बदले में अपने आदमियों को भेजकर राज्य में सड़कों के मोड़ों को गिन कर आने को कहा। अगले दिन बीरबल ने देखा कि अकबर किसी चीज की उत्सुकता से प्रतीक्षा कर रहे हैं। बीरबल ने कहा, ”जहांपनाह! आप चिंतित दिख रहे हैं। क्या कुछ परेशानी है?“ अकबर ने कहा, ”हां बीरबल! मैं टोडरमल की प्रतीक्षा कर रहा हूं। उसे मैंने अपने राज्य में सभी सड़कों के मोड़ गिन कर लाने को कहा है।“ फिर उन्होनें बीरबल को फारस के राजा द्वारा भेजे गए पत्र के बारे में बताया। बीरबल ने जैसे ही सारी बात सुनी, वैसे ही वह जोर से हंस पड़ा। बीरबल को हंसता हुआ देखकर अकबर हैरान हो गए। बीरबल ने कहा, ”महाराज मैं आपको अपने राज्य की ही नहीं, बल्कि दुनिया के क...

हिंदी story पार्ट -20

 बीरबल और तीन गुडि़यां  एक बार एक कलाकार तीन सुन्दर गुडि़यों को लेकर बादशाह अकबर के दरबार में आया। ये गुडि़यां बिल्कुल एक समान थी। उनमें इतनी समानता थी कि उनके बीच अंतर करना बहुत मुश्किल था। अकबर को गुडि़यां बहुत प्यारी लगी। उसने कहा, ”ये गुडि़यां मुझे बेच दो और मैं तुम्हें इनकी अच्छी कीमत दूंगा।“ कलाकार ने कहा, ”जहांपनाह! ये गुडि़यां बेचने के लिए नहीं हैं। बेशक मैं आपको ये उपहार के रूप में दे दूंगा यदि आपके दरबार में कोई यह बता दे कि तीनों में से अच्छी कौन सी है।“ यह एक अजीब पहेली थी। अकबर ने गुडि़यों को उठाया और करीब से देखा। किंतु तीनों गुडि़यों में इतनी समानता थी कि अकबर यह नहीं कह सका कि कौन सी अच्छी है। तब उसके प्रत्येक मंत्री ने इस पहेली को सुलझाने की कोशिश की, परंतु वे असफल रहे। अकबर ने बीरबल को बुलाकर कहा, ”बीरबल तुम क्यों नहीं कोशिश करते। मुझे विश्वास है कि तुम इस पहेली को हल कर लोगे।“ बीरबल अकबर की ओर सम्मान से झुका और गुडि़यों के पास गया। उसने प्रत्येक गुडि़या को हाथ में उठाया और बड़ी बारीकी से उनको देखा। हर कोई आश्चर्यचकित था। उसने एक गुडि़या के कान में फूंक मारी।...

हिंदी story पार्ट -19

 बीरबल की नियक्ति  एक बार बादशाह अकबर ने एक गाँव में अपना दरबार लगाया। उसी गाँव मे एक युवा ब्राह्मण किसान महेश दास भी रहता था। महेश ने बादशाह अकबर की घोषणा सुनी की उस कलाकार को बादशाह एक हज़ार स्वर्ण मुद्राए देंगे जो उनकी जीवंत तस्वीर बनाएगा। निश्चित दिन पर बादशाह के दरबार मे कलाकारों की भीड़ लग गयी। हर किसी के हाथ मे बादशाह की ढकी हुई तस्वीर थी। हर कोई दरबार मे यह जानने को उत्सुक था कि एक हज़ार स्वर्ण मोहरों का इनाम किसे मिलता है। अकबर एक ऊंचे आसन पर बैठे और एक के बाद एक कलाकारों कि तस्वीर देखते और अपने विचारों के साथ सभी तसवीरों को एक-एक कर मना करते गये और बोले यह एक दम वैसी नहीं है जैसा मैं अब हूं। जब महेश कि बारी आयी जो कि बाद में बीरबल के नाम से प्रसिद्ध हुए, तब तक अकबर परेशान हो चुके थे और बोले क्या तुम भी बाकी सब कि तरह ही मेरी तस्वीर बना कर लाये हो? लेकिन महेश बिना किसी भय के शांत स्वर में बोला “मेरे बादशाह, अपने आपको इसमे देखिए और स्वयं को संतुष्ट कीजिए।” आश्चर्य कि बात यह थी कि यह बादशाह कि कोई तस्वीर नहीं थी बल्कि महेश के वस्त्रों से निकला एक दर्पण था। यह देख कर सभी एक...

हिंदी story पार्ट -18

 बीरबल का संछिप्त परिचय  बीरबल (1528-1586) का असली नाम महेश था जो मुगल बादशाह अकबर के प्रशासन में मुगल दरबार का प्रमुख विज़ीर (वज़ीर-ए-आजम) था | बीरबल महान मुग़ल सम्राट अकबर के राजदरबार के नवरत्नों में प्रमुख थे- साधारणतया बीरबल का उल्लेख एक विदूषक के रूप में होता है – अकबर-बीरबल की आपसी नोक-झोंक व हास-परिहास के सैकड़ो किस्से व चुटकुले जनश्रुतियों में प्रचलित हैं, जिनके आधार पर बीरबल के विषय में एक आम धारणा यह है कि बीरबल एक विदूषक थे, जिनका एक मात्र काम अकबर का मनोविनोद करना और राजदरबार के गंभीर वातावरण को हल्का बनाना था| लकिन वास्तविकता ऐसी नहीं है-तत्कालीन ऐतिहासिक ग्रंथों के अध्यन से बीरबल के बहुआयामी व्यक्तित्व के सम्बन्ध में ढेर सारे अकाट्य प्रमाण मिलते हैं और यह निष्कर्ष निकलता है कि बीरबल मात्र एक विदूषक ही नहीं बल्कि एक बहादुर योद्धा, प्रख्यात दानवीर, रीति-नीति व धर्म के प्रकांड विद्वान तथा तत्कालीन रीति परंपरा के कुशल कवि थे |  – कवि भूषण ने अपने ग्रन्थ शिवराज भूषण में बीरबल को घाटमपुर तहसील के तिकवांपुर नामक गॉव का निवासी बताया है किन्तु स्थानीय जनश्रुतियों के अन...

हिंदी story पार्ट -17

 बगुला भगत  एक वन प्रदेश में बहुत बड़ा तालाब था. वहां हर प्रकार के जीवों के लिए भोजन सामग्री उपलब्ध थी. इसलिए वहां कई प्रकार के जीव, पक्षी, मछलियां, कछुए और केकड़े आदि रहते थें. पास में ही बगुला रहता था, जिसे मेहनत करना बिल्कुल अच्छा नहीं लगता था. उसकी आंखें भी कुछ कमज़ोर थीं. मछलियां पकड़ने के लिए तो मेहनत करनी पड़ती हैं, जो उसे खलती थी. इसलिए आलस के मारे वह अक्सर भूखा ही रहता था. एक टांग पर खड़ा यही सोचता रहता कि क्या उपाय किया जाए कि बिना हाथ-पैर हिलाए रो़ज खाना मिल जाए. एक दिन उसे एक उपाय सूझा तो वह उसे आज़माने बैठ गया. बगुला तालाब के किनारे खडा हो गया और आंसू बहाने लगा. एक केकडे ने उसे आंसू बहाते देखा तो वह उसके निकट आया और पूछने लगा “मामा, क्या बात है भोजन के लिए मछलियों का शिकार करने की बजाय खड़े होकर आंसू क्यों बहा रहे हो?” बगुले ने ज़ोर की हिचकी ली और भर्राए गले से बोला “बेटे, बहुत कर लिया मछलियों का शिकार अब मैं यह पाप और नहीं करुंगा. मेरी आत्मा जाग उठी है, इसलिए मैं निकट आई मछलियों को भी नहीं पकड़ रहा हूं. तुम तो देख ही रहे हो.” केकड़ा बोला “मामा, शिकार नहीं करोगे, कुछ खाओगे न...

हिंदी story पार्ट-16

 तीन मछलियां  एक नदी के किनारे उसी नदी से जुड़ा एक बड़ा जलाशय था. जलाशय में पानी गहरा होता हैं, इसलिए उसमें काई तथा मछलियों का प्रिय भोजन जलीय सूक्ष्म पौधे उगते हैं. ऐसी जगह मछलियों को बहुत पसंद आती है. उस जलाशय में भी नदी से बहुत-सी मछलियां आकर रहती थी. अंडे देने के लिए तो सभी मछलियां उस जलाशय में आती थी. वह जलाशय लंबी घास व झाडियों से घिरा होने के कारण आसानी से नज़र नहीं आता था. उसी में तीन मछलियों का झुंड रहता था. उनका स्वभाव बहुत अलग था. अन्ना मछली संकट आने के लक्षण मिलते ही संकट टालने का उपाय करने में विश्वास रखती थी. प्रत्यु मछली कहती थी कि संकट आने पर ही उससे बचने का यत्न करो. यद्दी मछली का सोचना था कि संकट को टालने या उससे बचने की बात बेकार है. करने कराने से कुछ नहीं होता, जो क़िस्मत में लिखा है, वह होकर रहेगा. एक दिन शाम को मछुआरे नदी में मछलियां पकड़कर घर जा रहे थे. बहुत कम मछलियां उनके जालों में फंसी थी, जिससे उनके चेहरे उदास थे. तभी उन्हें झाड़ियों के ऊपर मछलीखोर पक्षियों का झुंड जाता दिखाई दिया. सबकी चोंच में मछलियां दबी थी. वे चौंक गए. एक ने अनुमान लगाया, “दोस्तों! लगत...

हिंदी story पार्ट -15

 झूठी शान  एक जंगल में पहाड़ की चोटी पर एक किला बना था. किले के एक कोने के साथ बाहर की ओर एक बड़ा देवदार का पेड़ था. किले में उस राज्य की सेना की एक टुकड़ी तैनात थी. देवदार के पेड़ पर एक उल्लू रहता था. वह खाने की तलाश में नीचे घाटी में फैले चरागाहों में आता था. चरागाहों की लंबी घास और झाड़ियों में कई छोटे-छोटे कीट-पतंग मिलते थे, जिन्हें उल्लू अपना भोजन बनाता था. पास ही एक बड़ी झील थी, जिसमें हंस रहते थे. उल्लू पेड़ पर बैठा झील को निहारता रहता. उसे हंसों का तैरना और उड़ना देखकर बहुत आनंद आता था. वह सोचता कि हंस कितना शानदार पक्षी है. एकदम दूध-सा स़फेद, गुलगुला शरीर, सुराहीदार गर्दन, सुंदर मुख और तेजस्वी आंखें. उसकी बड़ी इच्छा थी कि कोई हंस उसे अपना दोस्त बना ले. एक दिन उल्लू पानी पीने के बहाने झील के किनारे एक झाड़ी पर उतरा. पास ही एक बहुत शालीन व सौम्य हंस पानी में तैर रहा था. हंस तैरता हुआ झाडी के पास आया. उल्लू ने बात करने का बहाना ढूंढ़ा, “हंस जी, आपकी आज्ञा हो तो पानी पी लूं. बहुत प्यास लगी है.” हंस ने चौंककर उसे देखा और बोला, “मित्र! पानी प्रकृति का दिया वरदान है. इस पर किसी एक का अध...

हिंदी story पार्ट -14

 एक और एक ग्यारह  एक बार की बात है बनगिरी के घने जंगल में एक उन्मुत्त हाथी ने भारी उत्पात मचा रखा था. वह अपनी ताकत के नशे में चूर होने के कारण किसी को कुछ नहीं समझता था. बनगिरी में ही एक पेड़ पर एक चिड़िया व चिड़े का छोटा-सा सुखी परिवार रहता थाय चिड़िया अंडों पर बैठी नन्हें-नन्हें प्यारे बच्चों के निकलने के सुनहरे सपने देखती रहती. एक दिन क्रूर हाथी गरजता, चिंघाड़ता हुआ पेड़ों को तोड़ता-मरोड़ता उसी ओर आया. देखते ही देखते उसने चिड़िया के घोंसले वाला पेड़ भी तोड़ डाला. घोंसला नीचे आ गिरा और अंडों पर हाथी का पैर पड़ा, जिससे वो चकनाचूर हो गए. चिड़िया और चिड़ा चीखने चिल्लाने के अलावा कुछ न कर सके. हाथी के जाने के बाद चिड़िया छाती पीट-पीटकर रोने लगी. तभी वहां कठफोड़वी आई. वह चिड़िया की अच्छी दोस्त थी. कठफोड़वी ने उनके रोने का कारण पूछा, तो चिड़िया ने पूरी कहानी बताई. कठफोड़वी बोली, “इस प्रकार दुख में डूबे रहने से कुछ नहीं होगा. उस हाथी को सबक सिखाने के लिए हमें कुछ करना होगा.” चिड़िया ने निराश होकर कहा, “हम छोटे-मोटे जीव उस बलशाली हाथी से कैसे टक्कर ले सकते हैं?” कठफोड़वी ने समझाया, “एक और एक मिलकर ग्यारह...

हिंदी story पार्ट-13

 झगड़ालू मे़ंढक  एक कुएं में ढेर सारे मेंढ़क रहते थे. मे़ंढकों के राजा का नाम था गंगदत्त. वह बहुत झगड़ालू स्वभाव का था. आसपास दो-तीन और कुए थे जिनमें भी मेंढक रहते थ. हर कुएं के मेंढ़कों का अपना राजा था. हर राजा से किसी न किसी बात पर गंगदत्त का झगड़ा होता रहता था. वह अपनी बेवकूफी कोई ग़लत काम करने लगता और कोई बुद्धिमान मेंढ़क उसे रोकने की कोशिश करता, तो मौक़ा मिलते ही वह अपने पाले हुए गुंडे मेंढ़कों से सलाह देने वाले की पिटाई करवा देता. कुएं के मे़ंढक गंगदत्त के इस व्यवहार से बहुत ग़ुस्से में थे. दरअसल, गंगदत्त अपनी हर मुसीबत के लिए दूसरों को दोष देता रहता था. एक दिन गंगदत्त की पास के पड़ोसी मे़ंढक राजा से खूब लड़ाई हुई. जमकर तू-तू मैं-मैं हुई. गंगदत्त ने अपने कुएं में आकर बाकी मेंढ़कों को बताया कि पड़ोसी राजा ने उसका अपमान किया है और इस अपमान का बदला लेने के लिए उसने अपने मे़ंढकों को पड़ोसी कुएं पर हमला करने को कहा, मगर सब जानते थे कि झगड़ा गंगदत्त ने ही शुरू किया होगा. इसलिए कुछ बुद्धिमान मेंढ़कों ने एकजुट होकर एक स्वर में कहा, “राजन, पड़ोसी कुएं में हमसे दुगुने मेंढ़क हैं. वे स्वस्थ और हमसे ज़...

हिंदी story पार्ट -12

 अक़्लमंद हंस  एक बहुत विशाल पेड़ था. उस पर वहुत सारे हंस रहते थे. उनमें एक बहुत स्याना हंस था, बुद्धिमान और बहुत दूरदर्शी. सब उसका आदर करके ‘ताऊ’ कहकर बुलाते थे. एक दिन उसने एक नन्ही-सी बेल को पेड़ के तने पर बहुत नीचे लिपटते पाया. ताऊ ने दूसरे हंसों को बुलाकर कहा “देखो, इस बेल को नष्ट कर दो. एक दिन यह बेल हम सबको मौत के मुंह में ले जाएगी.” एक युवा हंस हंसते हुए बोला “ताऊ, यह छोटी-सी बेल हमें कैसे मौत के मुंह में ले जाएगी?” स्याने हंस ने समझाया “आज यह तुम्हें छोटी-सी लग रही हैं. धीरे-धीरे यह पेड़ के सारे तने को लपेटा मारकर ऊपर तक आएगी. फिर बेल का तना मोटा होने लगेगा और पेड़ से चिपक जाएगा, तब नीचे से ऊपर तक पेड़ पर चढ़ने के लिए सीढ़ी बन जाएगी. कोई भी शिकारी सीढ़ी के सहारे चढ़कर हम तक पहुंच जाएगा और हम मारे जाएंगे.” दूसरे हंस को यक़ीन न आया “एक छोटी-सी बेल कैसे सीढ़ी बनेगी?” तीसरा हंस बोला “ताऊ, तुम तो एक छोटी-सी बेल को खींचकर ज़्यादा ही लंबा कर रहे हो.” एक हंस बड़बड़ाया “यह ताऊ अपनी अक्ल का रौब डालने के लिए अंट-शंट कहानी बना रहा है.” इस प्रकार किसी दूसरे हंस ने ताऊ की बात को गंभीरता से नहीं ल...

हिंदी story पार्ट -11

 चापलूस मंडली  जंगल में एक शेर रहता था. उसके चार सेवक थे चील, भेड़िया, लोमड़ी और चीता. चील दूर-दूर तक उड़कर समाचार लाती. चीता राजा का अंगरक्षक था. सदा उसके पीछे चलता. लोमडी शेर की सेक्रेटरी थी. भेड़िया गृहमंत्री था. उनका असली काम तो शेर की चापलूसी करना था. इस काम में चारों माहिर थे. इसलिए जंगल के दूसरे जानवर उन्हें चापलूस मंडली कहकर पुकारते थे. शेर शिकार करता. जितना खा सकता वह खाकर बाकी अपने सेवकों के लिए छोड़ जाया करता था. उससे मज़े में चारों का पेट भर जाता. एक दिन चील ने आकर चापलूस मंडली को सूचना दी “भाईयों! सड़क के किनारे एक ऊंट बैठा है.” भेड़िया चौंका “ऊंट! किसी काफिले से बिछड़ गया होगा.” चीते ने जीभ चटकाई और कहा “हम शेर को उसका शिकार करने को राज़ी कर लें तो कई दिन दावत उड़ा सकते हैं.” लोमड़ी ने घोषणा की “ शेर को राज़ी करना मेरा काम रहा.” लोमड़ी शेर राजा के पास गई और अपनी ज़ुबान में मिठास घोलकर बोली “महाराज, दूत ने ख़बर दी है कि एक ऊंट सड़क किनारे बैठा है. मैंने सुना है कि मनुष्य के पाले जानवर के मांस का स्वाद ही कुछ और होता है. बिल्कुल राजा-महाराजाओं के काबिल. आप आज्ञा दें तो आपके शिकार क...

हिंदी story पार्ट -10

 चतुर खरगोश और शेर  किसी घने जंगल में एक बहुत बड़ा शेर रहता था. वह रोज़ शिकार पर निकलता और एक-दो नहीं, कई-कई जानवरों का काम तमाम देता. जंगल के जानवर डरने लगे कि अगर शेर इसी तरह शिकार करता रहा, तो एक दिन ऐसा आएगा कि जंगल में कोई जानवर ही नहीं बचेगा. सारे जंगल में सनसनी फैल गई. शेर को रोकने के लिये कोई न कोई उपाय करना ज़रूरी था. एक दिन जंगल के सारे जानवर इकट्ठा हुए और इस प्रश्‍न पर विचार करने लगे. अंत में उन्होंने तय किया कि वे सब शेर के पास जाकर उनसे इस बारे में बात करेंगे. दूसरे दिन जानवरों का एक दल शेर के पास पहुंचा. उनको अपनी ओर आते देख शेर घबरा गया और उसने गरजकर पूछा, “क्या बात है? तुम सब यहां क्यों आए हो?” जानवर दल के नेता ने कहा, “महाराज, हम आपके पास निवेदन करने आए हैं. आप राजा हैं और हम आपकी प्रजा. जब आप शिकार करने निकलते हैं, तो बहुत जानवर मार डालते हैं. आप सबको खा भी नहीं पाते. इस तरह से हमारी संख्या कम होती जा रही है. अगर ऐसा ही चलता रहा, तो कुछ ही दिनों में जंगल में आपके सिवाय और कोई नहीं बचेगा. प्रजा के बिना राजा भी कैसे रह सकता है? यदि हम सभी मर जाएंगे, तो आप भी राजा ...

हिंदी story पार्ट -9

 कौआ और उल्लू  बहुत समय पहले की बात हैं, एक जंगल में विशाल बरगद का पेड़ कौओं की राजधानी थी. हजारों कौए उस पर रहते थे. उसी पेड़ पर कौओं का राजा मेघवर्ण भी रहता था. बरगद के पेड़ के पास ही एक पहाड़ी थी, जिसमें कई गुफाएं थीं. उन गुफाओं में उल्लू रहते थे, उनका राजा अरिमर्दन था. अरिमर्दन बहुत पराक्रमी था. कौओं को तो उसने उल्लुओं का दुश्मन नम्बर एक घोषित कर रखा था. उसे कौओं से इतनी नफरत थी कि किसी कौए को मारे बिना वह भोजन नहीं करता था. जब बहुत ज़्यादा कौए मारे जाने लगे तो उनके राजा मेघवर्ण को बहुत चिंता हुई. उसने इस समस्या पर विचार करने के लिए सभा बुलाई. मेघवर्ण बोला, “मेरे प्यारे कौओं, आपको तो पता ही हैं कि उल्लुओं के आक्रमण के कारण हमारा जीवन असुरक्षित हो गया है. हमारा शत्रु शक्तिशाली हैं और अहंकारी भी. हम पर रात को हमले किए जाते हैं. हम रात को देख नहीं पाते. हम दिन में जवाबी हमला नहीं कर पाते, क्योंकि वे गुफा के अंधेरे में सुरक्षित बैठे रहते है.” फिर मेघवर्ण ने स्याने और बुद्धिमान कौओं से अपने सुझाव देने को कहा. एक डरपोक कौआ बोला, “हमें उल्लुओं से समझौता कर लेना चाहिए. वह जो शर्त रखें,...

हिंदी story पार्ट -8

 एकता का बल  बहुत समय पहले की बात है, कबूतरों का एक झुंड खाने की तलाश में आसमान में उड़ता हुआ जा रहा था. कुछ दूर जाने के बाद ग़लती से भटककर ये झुंड ऐसे प्रदेश के ऊपर से गुजरा, जहां भयंकर अकाल पड़ा था. कबूतरों का सरदार चिंतित हो गया. कबूतरों के शरीर की शक्ति समाप्त होती जा रही थी. जल्द ही कुछ दाना मिलना ज़रूरी था. झुंड का युवा कबूतर सबसे नीचे उड़ रहा था. भोजन नज़र आने पर उसे ही बाकी दल को सूचित करना था. बहुत देर उड़ने के बाद वो लोग सूखाग्रस्त क्षेत्र से बाहर निकल आए. वहां उन्हें नीचे हरियाली नज़र आने लगी. ये देखकर उन्हें लगा कि अब भोजन मिल जाएगा. दल का युवा कबूतर और नीचे उड़ान भरने लगा. तभी उसे नीचे खेत में बहुत सारा अन्न बिखरा नज़र आया. वह बोला, “चाचा, नीचे एक खेत में बहुत सारा दाना बिखरा हुआ है. हम सबका पेट भर जाएगा.” सरदार ने सूचना पाते ही कबूतरों को नीचे उतरकर खेत में बिखरा दाना चुनने का आदेश दिया. सारा दल नीचे उतरा और दाना चुनने लगा. दरअसल, वह दाना एक बहेलिए ने बिखेर रखा था ताकि वो पक्षियों का शिकार कर सके. नीचे दाना डालने के साथ ही उसने ऊपर पेड़ पर जाल डाला हुआ था. जैसे ही कबूतरों क...

हिंदी story पार्ट -7

 अधजल गगरी छलकत जाए  एक बार एक किसान को पास के एक दूसरे गांव में जाना पड़ा। गांव पहुंचने के लिए एक नदी पार करना आवष्यक था। समस्या तब उत्पन्न हुई, जब वह नदी के किनारे पहुंचा। किसान को तैरना नहीं आता था। वहां नावें भी नहीं थी। सो उसके पास एक ही रास्ता था कि वह नदी उन्हीं स्थानों से पैदल पार करे, जहां पानी की गहराई बहुत कम थी। मगर उसके सामने एक दूसरी समस्या यह थी कि उसे यह नहीं मालूम था कि नदी में किस स्थान पर पानी की गहराई कम है।  तभी उसके गांव का एक दूसरा आदमी वहां आ गया। जब उसने किसान को किसी गहरे सोच में खोए हुए देखा तो उत्सुकतावश पूछ बैठा- ”मित्र, आखिर समस्या क्या है? बहुत दुखी दिखाई दे रहे हो। क्या मैं तुम्हारी कुछ मदद कर सकता हूं?“  किसान ने उसे अपनी समस्या बताई। उसे सुनकर वह आदमी हंसा और कहने लगा- ”मित्र, यह तो बहुत सरल है। तुम इतने दुखी क्यों होते हो। देखो, जिस स्थान पर नदी गहरी है, वहां का जल शांत होगा। इसके विपरीत उथला पानी हमेशा शोर करने वाला होगा।“ वह आदमी दोबारा हंसा और कहने लगा- ”यह सार्वभौम सत्य है! क्या तुमने कभी यह कहावत नहीं सुनी, अधजल गगरी छलकत जाए, ...

हिंदी story पार्ट -6

 एक गलत इच्छा  एक बार एक मधुमक्खी ने एक बरतन में शहद इकटृा किया और ईश्वर को प्रसन्न करने के लिए उनके समक्ष प्रस्तुत किया। ईश्वर उस भेंट से बहुत प्रसन्न हुए और मधुमक्खी से बोले कि वह जो चाहे इच्छा करे, उसे पूरा किया जाएगा। मधुमक्खी यह सुनकर बहुत प्रसन्न हुई और बोली- ”हे सर्वशक्तिमान ईश्वर, यदि आप सचमुच मुझसे प्रसन्न हैं तो मुझे यह वरदान दें कि मैं जिसे भी डंक मारूं, वह दर्द से तड़प उठे।“ ईश्वर यह सुनकर बहुत क्रोधित हुए- ”क्या इसके अतिरिक्त तुम्हारी अन्य कोई इच्छा नहीं है। ठीक है, मैंने वादा किया है कि तुम्हारी इच्छा पूरी करूंगा, परंतु एक शर्त है। वह यह कि तुम जिसे डंक मारोगी उसे तो बहुत दर्द होगा, परंतु तुम भी तुरंत मर जाओगी।“ दूसरे ही क्षण ईश्वर वहां से चले गए। निष्कर्ष- जो दूसरों का बुरा चाहते हैं, उनका भी बुरा ही होता है।

हिंदी story पार्ट -5

 जैसी करनी वैसी भरनी  जापान में ऐसी किंवदंती है कि एक समय एक स्थान पर दो भाई रहते थे। बड़े भाई की बहू कुछ तीखे स्वभाव की थी। इसलिए उनकी माता छोटे भाई के साथ रहा करती थी। छोटा भाई निर्धन था। उसके घर में खाना पीना भी पर्याप्त नहीं होता था। प्रायः छोटा भाई अपनी माता जी को बढ़िया भोजन की तो बात ही छोड़ो, साधारण अन्न भी नहीं दे पाता था। नए साल के प्रथम दिन उसके मन में चावल बनाकर खिलाने की तीव्र इच्छा हुई। ऐसे समय में मैं विवश हूं। बड़े भाई से उधार मांगने के सिवाय मेरे पास कोई साधन नहीं है। यह सोचकर वह बड़े भाई के घर गया। ”भाई साहब! थोड़े समय के लिए कुछ चावल मुझे उधार दीजिए जंगल में जाकर लकड़ियां इकट्ठी कर बेच दूंगा। जब पैसा मुझे मिल जाएगा, तो चावल खरीदकर आपको वापस कर दूंगा।“ छोटे भाई ने नम्रता से मांगा। किंतु बड़ा भाई अत्यंत निर्दयी प्रकृति का था। ”तुमको उधार देने योग्य एक धान भी मेरे पास नहीं है।“ यह कहकर गुस्से से दांत पीसते हुए उसने उसे भगा दिया। छोटा भाई निराश अवश्य हुआ, पर उसकी मातृ भक्ति में कोई अंतर नहीं आया। वह विवश होकर सुदूर पहाड़ तक जाकर पहाड़ी फूल ही ले आया। उन फूलों को बेचकर उसन...

हिंदी story पार्ट -4

 बांसुरी वाला  एक गांव में चूहों का आतंक छाया हुआ था। हजारों चूहे थे उस गांव में। उनकी तादाद इतनी अधिक थी कि आसपास के गांव वाले उस गांव को चूहों वाला गांव कहकर पुकारते थे। उस गांव में ऐसी कोई जगह नहीं थी, जहां चूहे न हों। घर में, दुकान में, गोदाम में, खेतों में, खलिहानों में हर जगह चूहे ही चूहे भरे पड़े थे। ये चूहे ढेरों अनाज खा जाते थे। घर का सामान, कपड़े, कागज पत्र सब कुछ कुतर डालते। पूरे गांव में चूहों का उत्पात मचा हुआ था। यहां तक कि मासूम बच्चों का कोमल शरीर तक भी ये कुतन लेते थे। चूहों के कारण गांव के लोगों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा था। गांव वाले किसी भी कीमत पर इन चूहों से छुटकारा पाना चाहते थे। इसलिए वह कई बार सभा भी कर चुके थे और कई बार बाहर से शिकारियों को बुला चुके थे, मगर शिकारी भला चूहों को कैसे पकड़ते। चूहे खतरा भांपते ही बिलों में घुस जाते। कई बार गांव में बिल्लियां लाकर छोड़ी गईं तो गांव में मौजूद कुत्तों के डर से वे स्वयं भाग गईं। बेचारे गांव वाले थक-हारकर बैठ गए और उन्होंने सब कुछ ईश्वर पर छोड़ दिया। एक दिन जैसे ईश्वर ने उनकी सुन ली। उस दिन एक बांसुरी वाला...

हिंदी story पार्ट -3

 नाश की जड़ अहंकार  एक समय की घटना है, एक बूढ़े आदमी ने अपनी बहुत सी सम्पति अपने पुत्र के नाम कर दी। उसने अपनी वसीयत में लिखा कि उसकी सारी सम्पति उसके मरने के बाद उसके पुत्र की हो जाएगी। और वसीयत करने के कुछ दिन बाद ही उसकी मृत्यु हो गई। सम्पति इतनी अधिक थी कि उसका पुत्र और आगे आने वाली सात पुश्तें तक भी आराम से बैठे-बैठे बिना कोई काम-धंधा किए खा-पी सकता था। मगर उसका पुत्र अभी भी संतुष्ट नहीं था, वह अधिक से अधिक धन कमाना चाहता था। इसलिए उसने अपनी सभी अचल सम्पति बेच दी और भिन्न-भिन्न वस्तुओं की खरीद-फरोख्त कर उनका व्यापार करना आरंभ कर दिया। भाग्यवश वह बहुत कम समय में अत्यधिक सफल हुआ तथा शीघ्र ही पहले से अधिक धनवान हो गया। उसने इतना अधिक इकटृा कर लिया कि दूसरे व्यापारी उससे ईर्ष्या करने लगे। कभी-कभी दूसरे व्यापारी या उसके मित्र उससे सफलता का रहस्य पूछते तो वह कहता- ”मैं इसलिए उन्नति कर रहा हूं कि मैं अपने धंधे को समझता हूं और कठारे परिश्रम करता हूं। मैं अपने ग्राहकों को भी खुश रखना जानता हूं।“ चूंकि उसने सचमुच व्यापार में तरक्की की थी, इसलिए उसके मित्र और अन्य व्यापारी उसकी शेखी...

हिन्दी story पार्ट -1

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लालची भाई प्राचीन काल की बात है। एक गांव में दो भाई रहते थे। बड़े भाई के पास बहुत सा धन था, परंतु छोटा भाई गरीब था। एक बार जब लोग नये साल कीखुशियांमना रहे थे, तो छोटे भाई के पास खाने को भी कुछ न था। वह बड़े भाई के घर गया और उसने उससे एक सेर चावल उधार मांगा। परन्तु बड़े भाई ने साफ इनकार कर दिया। जब छोटा भाई उसके घर से उदास लौट रहा था तो मार्ग में एक बूढ़ा मिला। बूढ़े के पास लकडि़यों का एक भारी गट्ठा था। बूढ़े ने उससे पूछा- ”तुम इतने उदास क्यों हो! कौन सी मुसीबत तुम पर आ पड़ी है?“ छोटे भाई ने अपनी दुख भरी कहानी उसे सुनाई। बूढ़े ने उसे दिलासा देते हुए कहा- ”यदि तुम लकड़ियों का यह गट्ठा मेरे घर तक पहुंचा दो तो मैं तुम्हें ऐसी चीज दूंगा जिसकी सहायता से तुम धनी हो जाओगे।“ छोटे भाई ने फौरन लकडि़यों का गट्ठा उठाकर अपने सिर पर रख लिया और फिर उसके पीछे-पीछे चल पड़ा। घर पहुंच कर बूढ़े ने उसे एक मालपुआ दिया और कहा- ”तुम इसे लेकर मंदिर के पीछे, वन में चले जाओ। वहां तुम्हें एक गुफा दिखाई देगी, जिसमें बहुत से बौने रहते हैं। मालपुआ उनका मनपसंद भोजन है। वे किसी भी मूल्य पर इसे पाना चाहेंगे। तुम उनसे धन ...